आईवीएफ की प्रक्रिया में महिलाओं के अंडों को बाहर निकालकर पुरुष के शुक्राणु के साथ लैब में फर्टिलाइज किया जाता है। फर्टिलाइज होने के बाद तैयार हुए भ्रूणों को महिला के गर्भाशय में ट्रांसफर करते हैं। जब कोई दंपत्ति आईवीएफ प्रक्रिया IVF Process के द्वारा उपचार कराता है और संतान प्राप्त कर लेता है, तब उनको बर्फ पर प्रयुक्त भ्रूण मिल जाते हैं। अब सवाल उठता है कि जो अतिरिक्त भ्रूण है उनके साथ क्या करना चाहिए?
What is the process of IVF with donor embryos? जैसे-जैसे महिला की उम्र बढ़ती है उसके शरीर में कई बदलाव आते जाते हैं जैसे आंखों का कमजोर होना, बालों का…
एक एंब्रायोलोजिस्ट Embryologist आप लोगों की प्रजनन से जुड़ी कइ समस्याओं को हल करते हैं लेकिन जब उन्हें यह सूचना देनी होती है कि सारी कोशिशों के बावजूद उन्हें कामयाबी नहीं मिली तो वो अपनेआप को बहुत ही असहाय महसूस करते हैं। आमतौर पर एग्स फ़र्टिलाइज़ हो जाते हैं। ऐसा बहुत ही कम बार होता है कि लंबे समय तक सारी कोशिशें करने के बावजूद एग्स फर्टिलाइज होने में कोई समस्या हो। ऐसा क्यों होता है और सबसे ज्यादा जरूरी बात यह है कि क्या इसका कोई इलाज है।
अगर आप लंबे समय से माता-पिता बनने की कोशिश करने के बावजूद सफल नहीं हो पा रहे हैं तो ऐसे में आपको तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर से बात करने की जरूरत है। डॉक्टर के पास ट्रीटमेंट के कई विकल्प होते हैं और वो आपकी जांच करने के बाद ही आपको सही विकल्प चुनने की सलाह देते हैं। आज मेडिकल वर्ल्ड ने काफी तरक्की कर ली है और इसने हमारे सामने आईवीएफ का विकल्प भी पेश किया है। आईवीएफ ट्रीटमेंट IVF Treatment आज के समय में अधिकतर महिलाओं के द्वारा अपनाया जाता है। इसका सक्सेस Success रेट सबसे ज्यादा होता है लेकिन इसमें महिलाओं को थोड़ी सी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ता है।
अंडा दान एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक महिला दूसरी महिला को गर्भधारण में मदद के लिए उसे अपने अंडे दान करती है। इस प्रक्रिया को आईवीएफ IVF के जरिए पूरा किया जाता है जिसमें अंडों को लैब में निषेचित किया जाता है। इसकी मदद से 18 से 54 साल की उम्र की महिलाएं माँ बन पाती हैं। यह एक बहुत ही संवेदनशील प्रक्रिया है जिसमें दोनों पक्षों की महिलाओं की आपसी सहमति आवश्यक है। केवल वही महिलाएं इस प्रक्रिया से गुजर सकती हैं जो शारीरिक रूप से इसके लिए तैयार हों।
बांझपन यानि इनफर्टिलिटी (Infertility) कई दंपतियों के जीवन की एक बड़ी समस्या है जिसके कारण वह माता-पिता बनने की खुशी पाने में असमर्थ हैं। आज के समय में जब यह बांझपन की समस्या आम हो गई तो इसके बारे में बातचीत करना बहुत महत्वपूर्ण है। इस विषय पर बातचीत करने का मकसद इस समस्या से जूझ रहे लोगों को उनकी परेशानी के हल से अवगत कराना है।
मानव शरीर कई तरह के हार्मोन्स (hormones in human body) के संतुलन पर काम करता है। ये हार्मोन हमारे विकास, सेहत और जीवन की हर गतिविधि को प्रभावित करते हैं।…
देश में इनफर्टिलिटी के आंकड़े एवं निसंतान दंपतियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में इनफर्टिलिटी की समस्या को झेल रहे लोगों के लिए (IVF technique) आईवीएफ प्रक्रिया का विकल्प काफी…
पीसीओडी का मतलब होता है पॉलीसिस्टिक ओवरियन डिसीज़। polycystic ovarian disease यह समस्या महिलाओं के अंदर आम तौर पर हार्मोन के असंतुलन की वजह से होती है। इस समस्या में महिला के अंदर एंड्रोजन (मेल हार्मोन) का स्तर बढ़ जाता है और ओवरी पर सिस्ट बनना शुरू हो जाती है। आमतौर पर मनुष्य में शरीर की सारी प्रक्रियाओं के सही से काम करने के लिए मेल और फ़ीमेल दोनों हार्मोन्स की जरूरत होती है। लेकिन पीसीओडी से पीड़ित महिला में पुरुष के हार्मोन की मात्रा सामान्य से कहीं ज्यादा बढ़ जाती है। जिसकी वजह से अंडाशय में दिक्कतें होने लगती हैं और इसके साथ ही अनियमित पीरियड्स की परेशानी भी हो सकती है।
What is a healthy diet to improve fertility? एक खुशहाल और बेहतर जीवन का आधार है अच्छा स्वास्थ्य। अच्छा स्वास्थ्य आपके जीवनयापन के लिए बेहद आवश्यक है। आपके रोज़मर्रा के…
