सोनोग्राफी क्या है?
Dr. Poonam Mishra is a clinical lead and senior IVF specialist at Crysta IVF Fertility Centre in Lucknow with an extensive 19+ years of experience in the field of infertility and reproductive medicine. She completed her MBBS with a Gold Medal from the prestigious Mahatma Gandhi Institute of Medical Sciences, Sevagram, Wardha in 2007. She pursued her post-graduation in Gynecology and Obstetrics at the renowned Lady Hardinge Medical College, New Delhi in 2014. Her dedication and hard work made her the topper of the National Board of Examination (NBE) for selection into fellowship. To further enhance her expertise in reproductive medicine, Dr. Poonam pursued a two-year fellowship in reproductive medicine from the prestigious Sir Ganga Ram Hospital, New Delhi. Her commitment and exceptional skills were recognized when she was honored with the super speciality fellow award at Sir Ganga Ram Hospital. With her specialized training in reproductive medicine. She has assisted/conducted 1000+ in-vitro fertilization (IVF), intrauterine insemination (IUI), hysteroscopy , and laparoscopy , accumulating a wealth of practical experience. She has a special interest in managing male infertility , recurrent IVF failure, poor ovarian reserve, and fertility preservation in oncology patients. In addition to her clinical accomplishments, Dr. Poonam has received several awards and recognition throughout her career. She also earned a Gold medal in the Quiz competition at Fertivision 2016, The 12th National Annual Conference of the Indian Fertility Society, Lucknow. Her contributions to the field have been widely recognized, and she has presented her research and findings at esteemed conferences such as the 22nd IFFS World Congress and Fertivision. Dr. Poonam Mishra is a respected member of several professional organizations, including the Indian Fertility Society (IFS), Indian Society for Assisted Reproduction (ISAR), and the Fertility Preservation Society of India. Currently, Dr. Poonam Mishra is offering her expertise as an IVF specialist at Crysta IVF fertility centre in Lucknow. Book a consultation with her today and take the first step towards achieving your dream of parenthood under the care of a skilled and compassionate professional.
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आज के समय में जब भी स्वास्थ्य की जांच की बात आती है, तो सोनोग्राफी (sonography) का नाम ज़रूर लिया जाता है। इसे हिंदी में अल्ट्रासाउंड (ultrasound) भी कहा जाता है। यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें ध्वनि तरंगों (sound waves) का उपयोग करके शरीर के अंदर की तस्वीरें बनाई जाती हैं। गर्भावस्था (pregnancy) से लेकर अन्य आंतरिक अंगों की स्थिति समझने तक, सोनोग्राफी का प्रयोग सुरक्षित और आसान तरीका माना जाता है।
In this article
- 1सोनोग्राफी क्या होती है? (What is Sonography)
- 2सोनोग्राफी की मुख्य विशेषताएँ (Key Features of Sonography)
- 3सोनोग्राफी कैसे की जाती है? (How Sonography is Done)
- 3.1प्रक्रिया के चरण (Steps of Sonography)
- 4सोनोग्राफी के प्रकार कौन-कौन से हैं? (Types of Sonography)
- 4.1प्रमुख प्रकार (Main Types of Sonography)
- 5सोनोग्राफी के फायदे क्या हैं? (Benefits of Sonography)
- 6सोनोग्राफी की सीमाएँ क्या हैं? (Limitations of Sonography)
- 7सोनोग्राफी कब करानी चाहिए? (When to Do Sonography)
- 7.1कब जरूरी है सोनोग्राफी? (Situations Requiring Sonography)
- 8Crysta IVF Clinic में सोनोग्राफी होती है (Sonography in Crysta IVF Clinic)
- 9Crysta IVF में सोनोग्राफी का महत्व
- 10निष्कर्ष (Conclusion on Sonography)
- 11अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs on Sonography)
- 11.1प्रश्न 1: सोनोग्राफी और अल्ट्रासाउंड में क्या फर्क है?
- 11.2प्रश्न 2: क्या सोनोग्राफी गर्भावस्था के लिए सुरक्षित है?
- 11.3प्रश्न 3: सोनोग्राफी टेस्ट में कितना समय लगता है?
- 11.4प्रश्न 4: सोनोग्राफी से किन बीमारियों का पता लगाया जा सकता है?
- 11.5प्रश्न 5: Crysta IVF Clinic में सोनोग्राफी क्यों करानी चाहिए?
सोनोग्राफी एक गैर-आक्रामक (non-invasive) प्रक्रिया है, यानी इसमें शरीर को कोई नुकसान नहीं पहुँचता और न ही किसी प्रकार की सर्जरी की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि यह टेस्ट आज के समय में सबसे ज़्यादा किया जाने वाला डायग्नोस्टिक परीक्षण (diagnostic test) है। डॉक्टर इसे गर्भवती महिलाओं के भ्रूण की निगरानी (fetal monitoring), आंतरिक अंगों की जांच (internal organ checkup), और कई बीमारियों के शुरुआती निदान (early diagnosis) के लिए सबसे उपयुक्त मानते हैं। इसकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण यह है कि यह सुरक्षित, सस्ता और लगभग हर अस्पताल व क्लिनिक में उपलब्ध है।
सोनोग्राफी क्या होती है? (What is Sonography)
सोनोग्राफी (ultrasonography) एक चिकित्सा परीक्षण है जिसमें हाई-फ्रीक्वेंसी (high frequency) ध्वनि तरंगों का उपयोग किया जाता है। यह तरंगें शरीर के अंदर भेजी जाती हैं और वहां से लौटकर कंप्यूटर स्क्रीन पर छवि (image) के रूप में दिखाई देती हैं। इस प्रक्रिया से डॉक्टर शरीर के अंगों, ऊतकों और गर्भ में पल रहे शिशु को भी देख सकते हैं।
यह परीक्षण बिना दर्द (painless test) और बिना विकिरण (radiation free) होता है। गर्भावस्था (pregnancy ultrasound) में भ्रूण की स्थिति व विकास की जानकारी देता है। आंतरिक अंग जैसे यकृत (liver), गुर्दे (kidney), पित्ताशय (gallbladder) और अंडाशय (ovaries) की जाँच के लिए उपयोगी है। तुरंत परिणाम (real time imaging) उपलब्ध कराता है।
सोनोग्राफी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सुरक्षित, तेज़ और भरोसेमंद प्रक्रिया है। इसे रोगों के शुरुआती चरण में निदान (early diagnosis) के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।
यह भी पढ़ें - ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड प्रक्रिया, फायदे, कीमत और उपयोग
सोनोग्राफी की मुख्य विशेषताएँ (Key Features of Sonography)
- गैर-आक्रामक (Non-invasive): शरीर को किसी प्रकार की चोट या नुकसान नहीं पहुँचता।
- सुरक्षित (Safe Test): इसमें हानिकारक विकिरण (harmful radiation) नहीं होता।
- तुरंत परिणाम (Instant Result): छवि स्क्रीन पर तुरंत दिखाई देती है।
- बहुउपयोगी (Multi-purpose): गर्भावस्था, आंतरिक अंगों, रक्त प्रवाह और रोग निदान में प्रयोग।
- दोहराने योग्य (Repeatable): इसे बार-बार कराया जा सकता है, बिना किसी दुष्प्रभाव के।
- शुरुआती निदान (Early Detection): ट्यूमर, पथरी, सूजन और गर्भ संबंधी समस्याओं की पहचान समय रहते हो जाती है।
- सोनोग्राफी स्वास्थ्य की निगरानी और रोगों की समय पर पहचान का एक आधुनिक और विश्वसनीय तरीका है।
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सोनोग्राफी कैसे की जाती है? (How Sonography is Done)
इस प्रक्रिया में डॉक्टर उस हिस्से पर जेल (ultrasound gel) लगाते हैं जिसे स्कैन करना होता है। इसके बाद ट्रांसड्यूसर (transducer) नाम का यंत्र त्वचा पर रखा जाता है। यह यंत्र ध्वनि तरंगें भेजता और वापस आने वाले प्रतिध्वनि (echo) को पकड़कर कंप्यूटर पर तस्वीर बनाता है। इस पूरी प्रक्रिया में मरीज को किसी प्रकार का दर्द या असुविधा महसूस नहीं होती।
कभी-कभी खास जाँच के लिए ट्रांसवेजिनल अल्ट्रासाउंड (transvaginal ultrasound) या एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (endoscopic ultrasound) किया जाता है, जिसमें ट्रांसड्यूसर को शरीर के अंदर डालकर अधिक स्पष्ट छवियाँ प्राप्त की जाती हैं। यह विशेष रूप से प्रजनन अंगों (reproductive organs) या पाचन तंत्र (digestive system) की गहराई से जांच के लिए उपयोग किया जाता है।
प्रक्रिया के चरण (Steps of Sonography)
- जेल का उपयोग (Gel Application): बेहतर संपर्क और ध्वनि तरंगों की स्पष्टता के लिए त्वचा पर जेल लगाया जाता है।
- ट्रांसड्यूसर स्कैन (Transducer Scan): ट्रांसड्यूसर धीरे-धीरे त्वचा पर घुमाया जाता है ताकि तरंगें भेजी और प्राप्त की जा सकें।
- इमेज निर्माण (Image Formation): लौटकर आने वाली ध्वनि तरंगों को कंप्यूटर तुरंत छवि में बदल देता है।
- विशेष स्कैन (Special Scans): गर्भाशय या अंडाशय जैसी जगहों की जाँच के लिए ट्रांसवेजिनल या अन्य तकनीक अपनाई जा सकती है।
- रिपोर्ट तैयार (Report Preparation): रेडियोलॉजिस्ट छवियों का विश्लेषण कर लिखित रिपोर्ट तैयार करता है।
यह पूरी प्रक्रिया लगभग 20–30 मिनट की होती है और पूरी तरह दर्दरहित एवं सुरक्षित रहती है। मरीज जांच के बाद तुरंत अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट सकता है।
सोनोग्राफी के प्रकार कौन-कौन से हैं? (Types of Sonography)
सोनोग्राफी कई प्रकार की होती है, और हर प्रकार का उपयोग अलग-अलग चिकित्सा स्थितियों और जांचों में किया जाता है। सही प्रकार का चयन रोगी की स्थिति, जांच के उद्देश्य और अंगों की ज़रूरत पर निर्भर करता है।
प्रमुख प्रकार (Main Types of Sonography)
- ट्रांसएब्डोमिनल सोनोग्राफी (Transabdominal Sonography): यह सबसे सामान्य तकनीक है जिसमें ट्रांसड्यूसर पेट की सतह पर रखा जाता है। इसका प्रयोग गर्भावस्था (pregnancy ultrasound), यकृत (liver), गुर्दे (kidney) और पित्ताशय (gallbladder) की जांच में किया जाता है।
- ट्रांसवेजिनल सोनोग्राफी (Transvaginal Sonography / TVS): इस जांच में ट्रांसड्यूसर को योनि मार्ग से डाला जाता है ताकि गर्भाशय (uterus) और अंडाशय (ovaries) की अधिक स्पष्ट छवियाँ मिल सकें। यह शुरुआती गर्भावस्था और स्त्रीरोग संबंधी समस्याओं की पहचान में उपयोगी है।
- डॉपलर सोनोग्राफी (Doppler Sonography): इसमें रक्त प्रवाह (blood flow) और रक्त वाहिकाओं (blood vessels) की गति और दिशा को मापा जाता है। यह हृदय (heart) और नसों की बीमारियों के निदान में बेहद मददगार है।
- एंडोस्कोपिक सोनोग्राफी (Endoscopic Sonography / EUS): इसमें एक विशेष एंडोस्कोप (endoscope) में ट्रांसड्यूसर लगा होता है जिसे शरीर के भीतर डाला जाता है। इसका प्रयोग पाचन तंत्र (digestive system) और उससे जुड़े अंगों की गहराई से जांच में किया जाता है।
हर प्रकार की सोनोग्राफी की अपनी भूमिका होती है और डॉक्टर रोगी की स्थिति देखकर यह तय करते हैं कि किस तकनीक का उपयोग सबसे उपयुक्त होगा।
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सोनोग्राफी के फायदे क्या हैं? (Benefits of Sonography)
सोनोग्राफी एक ऐसा परीक्षण है जिसे सबसे सुरक्षित (safe sonography) और सरल जांच माना जाता है। इसकी खासियत यह है कि इसमें हानिकारक विकिरण (radiation) का प्रयोग नहीं होता, इसलिए इसे गर्भवती महिलाओं (pregnant women) के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है।
मुख्य फायदे (Key Benefits)
- सुरक्षित प्रक्रिया (Safe Procedure): इसमें एक्स-रे या सीटी स्कैन की तरह हानिकारक विकिरण नहीं होता, जिससे यह हर आयु वर्ग के लिए उपयुक्त है।
- दर्दरहित (Painless Test): इस जांच में सुई या चीरे की आवश्यकता नहीं पड़ती, इसलिए मरीज को कोई दर्द नहीं होता।
- गर्भावस्था में उपयोगी (Pregnancy Ultrasound): भ्रूण के विकास, धड़कन और स्थिति की निगरानी में यह सबसे महत्वपूर्ण जांच है।
- अंगों की जाँच (Organ Examination): गुर्दे, यकृत, पित्ताशय और हृदय जैसे आंतरिक अंगों की समस्याओं का पता लगाया जा सकता है।
- तुरंत परिणाम (Instant Result): जांच के दौरान ही छवियाँ स्क्रीन पर दिख जाती हैं, जिससे डॉक्टर तुरंत मूल्यांकन कर सकते हैं।
- सस्ता और सुलभ (Affordable & Accessible): लगभग हर अस्पताल और क्लिनिक में आसानी से उपलब्ध है और अन्य टेस्ट की तुलना में कम खर्चीला है।
इसके लाभ इसे एक भरोसेमंद और लोकप्रिय टेस्ट बनाते हैं, जो स्वास्थ्य देखभाल में प्राथमिक विकल्प के रूप में प्रयोग होता है।
सोनोग्राफी की सीमाएँ क्या हैं? (Limitations of Sonography)
भले ही सोनोग्राफी (sonography) एक सुरक्षित और आसान प्रक्रिया है, लेकिन इसके कुछ सीमाएँ भी होती हैं जिन्हें जानना ज़रूरी है। यह हर स्थिति में पूरी तरह प्रभावी नहीं होती और कई बार डॉक्टर को अन्य उन्नत तकनीकों जैसे MRI या CT Scan का सहारा लेना पड़ता है।
मुख्य सीमाएँ (Key Limitations)
- मोटापा या गैस (Obesity or Gas Issues): यदि मरीज अधिक मोटापे का शिकार हो या पेट में गैस की समस्या हो तो अल्ट्रासाउंड तरंगें सही तरीके से नहीं पहुँच पातीं, जिससे छवियाँ धुंधली हो जाती हैं।
- हड्डियों और गैस वाली जगहों पर समस्या (Bone & Gas Obstruction): हड्डी या वायु (air/gas) वाले हिस्सों की छवियाँ साफ़ नहीं आतीं क्योंकि ध्वनि तरंगें इन्हें पार नहीं कर पातीं।
- सीमित निदान (Limited Diagnosis): कुछ जटिल बीमारियों जैसे ट्यूमर, कैंसर या गहरी नसों की बीमारी के लिए केवल सोनोग्राफी पर्याप्त नहीं होती, इन स्थितियों में MRI या CT Scan की आवश्यकता होती है।
- आंतरिक सोनोग्राफी में असुविधा (Discomfort in Internal Sonography): ट्रांसवेजिनल या एंडोस्कोपिक सोनोग्राफी के दौरान कुछ मरीजों को हल्की असुविधा हो सकती है।
- विशेषज्ञ की आवश्यकता (Need for Expertise): सही रिपोर्टिंग के लिए अनुभवी रेडियोलॉजिस्ट होना ज़रूरी है, वरना गलत निष्कर्ष भी निकल सकते हैं।
सीमाएँ होने के बावजूद, सोनोग्राफी शुरुआती जांच और रोगों की प्राथमिक पहचान के लिए सबसे उपयुक्त व भरोसेमंद विकल्प है।
सोनोग्राफी कब करानी चाहिए? (When to Do Sonography)
सोनोग्राफी (sonography / ultrasound) एक ऐसी जांच है जिसे डॉक्टर कई अलग-अलग परिस्थितियों में कराने की सलाह देते हैं। यह न सिर्फ रोगों के निदान (diagnosis) में मदद करती है बल्कि गर्भावस्था (pregnancy) के दौरान माँ और शिशु दोनों के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए भी बेहद आवश्यक है।
कब जरूरी है सोनोग्राफी? (Situations Requiring Sonography)
- गर्भावस्था में (Pregnancy Ultrasound): भ्रूण की स्थिति, हृदय की धड़कन, विकास और किसी भी असामान्यता को जानने के लिए।
- अचानक दर्द या सूजन (Sudden Pain or Swelling): यदि पेट या अन्य हिस्सों में दर्द या सूजन हो, तो कारण पता करने के लिए।
- अंगों की जाँच (Organ Examination): यकृत (liver), गुर्दा (kidney), पित्ताशय (gallbladder) और अंडाशय (ovaries) से जुड़ी समस्याओं का पता लगाने के लिए।
- रक्त प्रवाह की समस्या (Blood Flow Test): धमनियों और नसों में ब्लॉकेज या रक्त प्रवाह की रुकावट की जांच के लिए डॉपलर सोनोग्राफी की जाती है।
- बायोप्सी में मार्गदर्शन (Biopsy Guidance): जब शरीर के किसी हिस्से से ऊतक का सैंपल लेना हो, तो सही जगह पर सुई लगाने के लिए सोनोग्राफी का सहारा लिया जाता है।
- लक्षण अस्पष्ट हों (Unclear Symptoms): जब बीमारी के लक्षण स्पष्ट न हों और डॉक्टर शुरुआती जाँच करना चाहें।
सोनोग्राफी कब करानी है यह हमेशा डॉक्टर के परामर्श से ही तय करना चाहिए, ताकि अनावश्यक जांच से बचा जा सके और सही समय पर सही निदान किया जा सके।
Crysta IVF Clinic में सोनोग्राफी होती है (Sonography in Crysta IVF Clinic)
दिल्ली में स्थित Crysta IVF Clinic in Delhi और इसकी अन्य शाखाओं (Pune, Lucknow, Kolkata, Kanpur, Patna) में सोनोग्राफी का उपयोग महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य (fertility health) और IVF प्रक्रियाओं में बड़े पैमाने पर किया जाता है। यहाँ आधुनिक तकनीक और अनुभवी डॉक्टरों की मदद से गर्भाशय (uterus), अंडाशय (ovaries), एंडोमेट्रियम (endometrium) और भ्रूण (fetus) की स्थिति की गहन जांच की जाती है।
सोनोग्राफी IVF ट्रीटमेंट (IVF treatment) का एक अनिवार्य हिस्सा है, क्योंकि इसके बिना भ्रूण स्थानांतरण (embryo transfer) और अंडाणु निकासी (egg retrieval) जैसी प्रक्रियाओं को सही तरीके से करना संभव नहीं है।
Crysta IVF में सोनोग्राफी का महत्व
- गर्भाशय की जांच (Uterus Examination): गर्भाशय की संरचना, आकार और किसी भी असामान्यता का पता लगाया जाता है।
- अंडाशय की जांच (Ovary Checkup): अंडाशय में अंडाणुओं (eggs) की संख्या और उनकी गुणवत्ता जानी जाती है।
- एंडोमेट्रियम का मूल्यांकन (Endometrium Evaluation): गर्भधारण के लिए ज़रूरी एंडोमेट्रियम की मोटाई और स्थिति का परीक्षण।
- भ्रूण विकास (Fetal Growth Monitoring): गर्भावस्था के दौरान शिशु की स्थिति और विकास की निगरानी।
- IVF प्रक्रिया में मार्गदर्शन (Guidance in IVF Process): एग पिक-अप, भ्रूण ट्रांसफर और फॉलिकल मॉनिटरिंग के लिए।
Crysta IVF जैसे क्लिनिक में सोनोग्राफी का उपयोग न सिर्फ आधुनिक तकनीक के साथ इलाज को अधिक प्रभावी बनाता है बल्कि दंपतियों को गर्भधारण की यात्रा में सुरक्षित और भरोसेमंद अनुभव भी प्रदान करता है।
निष्कर्ष (Conclusion on Sonography)
सोनोग्राफी (sonography / ultrasound) एक सुरक्षित और उपयोगी जाँच है जो गर्भावस्था और विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं में बेहद मददगार साबित होती है। इसकी मदद से डॉक्टर बिना दर्द और बिना सर्जरी के शरीर के अंदरूनी हिस्सों की जानकारी प्राप्त करते हैं। यदि आप दिल्ली या अन्य शहरों में स्त्रीरोग या प्रजनन से जुड़ी जांच कराना चाहते हैं, तो Crysta IVF Clinic एक भरोसेमंद विकल्प हो सकता है।
इसके अलावा, सोनोग्राफी समय रहते रोगों की पहचान (early detection) में भी सहायक है, जिससे गंभीर बीमारियों का इलाज आसान हो जाता है। यह जांच किफायती (affordable) होने के साथ-साथ हर जगह उपलब्ध भी है। गर्भावस्था की निगरानी (pregnancy monitoring) से लेकर आंतरिक अंगों की जांच तक, यह एक बहुउपयोगी (multi-purpose) तकनीक है। इसीलिए, इसे आधुनिक चिकित्सा प्रणाली में एक अहम स्थान दिया गया है और डॉक्टर भी इसे सबसे पहले सुझाए जाने वाले परीक्षणों में गिनते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs on Sonography)
प्रश्न 1: सोनोग्राफी और अल्ट्रासाउंड में क्या फर्क है?
उत्तर: दोनों एक ही प्रक्रिया हैं। सोनोग्राफी को ही अल्ट्रासाउंड (ultrasound) कहा जाता है। इसमें ध्वनि तरंगों का उपयोग कर शरीर के अंदर की छवियाँ बनाई जाती हैं।
प्रश्न 2: क्या सोनोग्राफी गर्भावस्था के लिए सुरक्षित है?
उत्तर: हाँ, यह पूरी तरह सुरक्षित (safe sonography in pregnancy) है क्योंकि इसमें विकिरण (radiation) का इस्तेमाल नहीं होता। गर्भावस्था के दौरान भ्रूण की निगरानी के लिए यह सबसे ज्यादा उपयोगी जांच है।
प्रश्न 3: सोनोग्राफी टेस्ट में कितना समय लगता है?
उत्तर: सामान्यतः एक सोनोग्राफी जांच में 20 से 30 मिनट का समय लगता है। जांच के तुरंत बाद मरीज अपनी सामान्य गतिविधियाँ कर सकता है।
प्रश्न 4: सोनोग्राफी से किन बीमारियों का पता लगाया जा सकता है?
उत्तर: इससे पित्त की पथरी (gallstones), किडनी की समस्या (kidney issues), यकृत की सूजन (liver inflammation), गर्भाशय और अंडाशय की समस्याएँ तथा रक्त प्रवाह (blood circulation issues) की जांच की जा सकती है।
प्रश्न 5: Crysta IVF Clinic में सोनोग्राफी क्यों करानी चाहिए?
उत्तर: Crysta IVF Clinic (New Delhi, Pune, Lucknow, Kolkata, Kanpur, Patna) आधुनिक तकनीक और अनुभवी विशेषज्ञों के साथ IVF और प्रजनन स्वास्थ्य (fertility health) की जांच करता है। यहाँ सोनोग्राफी द्वारा भ्रूण, गर्भाशय और अंडाशय की गहन जांच की जाती है, जिससे दंपतियों को सुरक्षित और भरोसेमंद उपचार मिलता है।
Disclaimer
As per the "PCPNDT" (Regulation and Prevention of Misuse) Act, 1994, Gender Selection and Determination is strictly prohibited and is a criminal offense. Our centers strictly do not determine the sex of the fetus. The content is for informational and educational purposes only. Treatment of patients varies based on his/her medical condition. Always consult with your doctor for any treatment.
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