स्पर्म मोटिलिटी बढ़ाने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय

स्पर्म मोटिलिटी बढ़ाने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय

Medically reviewed byDr. Sutapan SamantaSenior IVF Specialist · 14+ Years of experience

Dr. Sutapan Samanta is a renowned Fertility Consultant and IVF Doctor, offering compassionate reproductive care across West Bengal, especially in Kolkata, Asansol, and Durgapur. With over 13 years of medical experience and more than 8 years dedicated to IVF and infertility management, he has transformed the parenthood journey for thousands of hopeful couples through individualized, evidence-based treatment plans. A firm believer in academic excellence, Dr. Sutapan completed his MBBS from R.G. Kar Medical College and Hospital, Kolkata in 2011, followed by an M.S. in Obstetrics and Gynaecology from Medical College Hospital, Kolkata in 2015. He also holds a DNB and completed a prestigious Fellowship in Assisted Reproductive Techniques (ART) from Indira IVF, Udaipur in 2017. His leadership experience includes managing an ART Level 2 centre as Director and contributing significantly to the QAI accreditation process, reflecting his commitment to quality in fertility care. Over the years, he has performed more than 2,500 ovum pick-ups and embryo transfers, handled over 3,000 IVF cycles, and conducted more than 1,000 fertility-enhancing surgeries, leading to over 2,000 successful pregnancies. These achievements stand as a testament to his clinical excellence and patient-first approach. In addition to his clinical work, Dr. Sutapan has been part of various CMEs and national conferences as an expert faculty and panellist, contributing his insights to the reproductive health community. His areas of special interest include treating Endometriosis-related infertility, low AMH conditions, repeated IVF failures, and complex male infertility issues like Azoospermia. Patients appreciate his honest counselling, ethical approach and consistent focus on patient-specific care. If you're facing challenges in conceiving and need guidance from a dedicated and skilled fertility expert, Dr. Sutapan Samanta is one of the most trusted names in Kolkata and nearby regions.

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प्रजनन क्षमता (fertility) हर किसी के लिए एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय है। जब किसी व्यक्ति को गर्भधारण में कठिनाई होती है, तो यह स्थिति न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। पुरुषों में, एक सामान्य समस्या जो गर्भधारण में कठिनाई पैदा कर सकती है, वह है स्पर्म मोटिलिटी (sperm motility)। सरल शब्दों में कहें तो, स्पर्म मोटिलिटी का मतलब है कि शुक्राणु (sperm) अपनी गति और दिशा को सही तरीके से नियंत्रित कर पाते हैं या नहीं। यदि शुक्राणु अपनी गति में कुशल नहीं होते, तो वे अंडाणु (egg) तक पहुँचने में असमर्थ होते हैं, जिससे गर्भधारण की संभावना कम हो जाती है।

In this article

  1. 1स्पर्म मोटिलिटी क्या है? (Sperm Motility kya hai?)
  2. 2स्पर्म मोटिलिटी को कैसे मापते हैं? (Sperm Motility ko Kaise Measure Karte Hain?)
  3. 3स्पर्म मोटिलिटी पर प्रभाव डालने वाले कारण (Sperm Motility Par Prabhavit Karne Wale Factors)
  4. 4स्पर्म मोटिलिटी को कैसे बढ़ाएं? (Sperm Motility ko Kaise Badhayein?)
  5. 5स्पर्म मोटिलिटी को बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक और प्राकृतिक उपाय (Sperm Motility ko Badhane ke Liye Ayurvedic Aur Natural Upay)
  6. 6स्पर्म मोटिलिटी को बढ़ाने के लिए मेडिकल उपचार (Sperm Motility ko Badhane ke Liye Medical Treatments)
  7. 7स्पर्म मोटिलिटी को बढ़ाने के लिए जीवनशैली में बदलाव (Sperm Motility ko Badhane ke Liye Lifestyle Changes)
  8. 8स्पर्म मोटिलिटी के लिए महत्वपूर्ण जीवनशैली आदतें (Sperm Motility ke Liye Important Lifestyle Habits)

दुनिया भर में लाखों जोड़े प्रजनन से संबंधित समस्याओं का सामना कर रहे हैं, और इनमें से कई मामलों में शुक्राणु की गतिशीलता एक प्रमुख कारण बनती है। शुक्राणु की गतिशीलता और गुणवत्ता दोनों को प्रभावित करने वाले कई कारण हो सकते हैं, जैसे जीवनशैली की आदतें, आहार, शारीरिक समस्याएँ और मानसिक स्वास्थ्य। इस ब्लॉग का उद्देश्य यही है कि हम समझ सकें कि स्पर्म मोटिलिटी क्या है, इसके कारण क्या हो सकते हैं, और हम इसे किस तरह सुधार सकते हैं। सही जानकारी और उपचार के जरिए हम इस समस्या को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं और इससे निपटने के लिए प्रभावी कदम उठा सकते हैं।

स्पर्म मोटिलिटी क्या है? (Sperm Motility kya hai?)

स्पर्म मोटिलिटी (sperm motility) का सीधा अर्थ है शुक्राणु की गति और दिशा। जब हम कहते हैं कि किसी पुरुष के शुक्राणु "गतिशील" हैं, तो इसका मतलब है कि वे ठीक से और सही दिशा में तैरने में सक्षम होते हैं। प्रजनन के दृष्टिकोण से यह अत्यधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि गर्भाधान (conception) के लिए शुक्राणु का अंडाणु तक पहुँचने में सक्षम होना आवश्यक है।

शुक्राणु की गतिशीलता को विभिन्न प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है, जैसे प्रोग्रेसिव मोटिलिटी (जहां शुक्राणु सीधी दिशा में तैरते हैं) और नॉन-प्रोग्रेसिव मोटिलिटी (जहां शुक्राणु घूमते तो हैं, लेकिन सही दिशा में नहीं जाते)। इसके अतिरिक्त, कुछ शुक्राणु पूरी तरह से इम्मोटाइल (अचल) हो सकते हैं, जो बिल्कुल नहीं तैरते। जब शुक्राणु अपनी गति से अंडाणु की ओर नहीं बढ़ पाते, तो यह गर्भधारण की प्रक्रिया को मुश्किल बना सकता है।

आम तौर पर, स्वस्थ शुक्राणु में 40% से 60% तक की प्रोग्रेसिव मोटिलिटी होनी चाहिए। यदि शुक्राणु की गतिशीलता इससे कम हो जाती है, तो यह पुरुष की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है। शुक्राणु की मोटिलिटी में कमी का मतलब यह नहीं है कि पुरुष को हमेशा प्रजनन संबंधी समस्याएँ होंगी, लेकिन यह निश्चित रूप से गर्भधारण की संभावना को घटा सकता है। इस खंड में, हम देखेंगे कि स्पर्म मोटिलिटी के विभिन्न प्रकार क्या होते हैं और कैसे यह गर्भधारण में भूमिका निभाते हैं।

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स्पर्म मोटिलिटी को कैसे मापते हैं? (Sperm Motility ko Kaise Measure Karte Hain?)

जब शुक्राणु की गतिशीलता के बारे में चिंता होती है, तो सबसे पहले जो कदम उठाया जाता है, वह है स्पर्म एनालिसिस (semen analysis)। यह टेस्ट शुक्राणुओं की संख्या, उनकी गति, और उनके आकार का मापने के लिए किया जाता है। इस टेस्ट से यह स्पष्ट होता है कि शुक्राणु कितनी तेजी से और किस दिशा में तैर रहे हैं, और यह गर्भधारण में कितना मददगार हो सकता है।

स्पर्म एनालिसिस में सबसे पहले, डॉक्टर या लैब तकनीशियन शुक्राणु के नमूने की जाँच करते हैं। इसके बाद, शुक्राणुओं की संख्या, उनके आकार और उनकी गति को मापा जाता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि शुक्राणु कितने अच्छे हैं, उनकी प्रोग्रेसिव मोटिलिटी (सीधी दिशा में तैरने की क्षमता) और नॉन-प्रोग्रेसिव मोटिलिटी (अस्थिर दिशा में तैरने की क्षमता) को देखा जाता है।

मानक के रूप में, 40% से 60% प्रोग्रेसिव मोटिलिटी सामान्य मानी जाती है। इसके अलावा, एक अच्छे परिणाम के लिए, शुक्राणु की संख्या प्रति मिलीलीटर 15 मिलियन से अधिक होनी चाहिए। इस परीक्षण से डॉक्टर यह भी आकलन कर सकते हैं कि क्या शुक्राणु के निर्माण में कोई समस्या है, और यह इस आधार पर इलाज की दिशा निर्धारित कर सकते हैं। जब शुक्राणु की गुणवत्ता और गति की सही पहचान होती है, तो प्रजनन चिकित्सा में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।

स्पर्म मोटिलिटी पर प्रभाव डालने वाले कारण (Sperm Motility Par Prabhavit Karne Wale Factors)

शुक्राणु की गतिशीलता को प्रभावित करने वाले कई कारक होते हैं, जिनमें से कुछ जीवनशैली से जुड़े होते हैं और कुछ शारीरिक या आनुवंशिक कारणों से उत्पन्न होते हैं। शुक्राणु की गतिशीलता में कमी एक सामान्य समस्या हो सकती है, लेकिन इसका समाधान संभव है।

  • जीवनशैली (Lifestyle Factors):
  • धूम्रपान, शराब का सेवन, और नशीले पदार्थों का उपयोग शुक्राणु की गतिशीलता को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकते हैं। यह सब शुक्राणु के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं और उनकी गति को धीमा कर देते हैं। इसके अलावा, अत्यधिक तनाव भी शुक्राणु की गुणवत्ता पर असर डाल सकता है। तनाव से शरीर में कोर्टिसोल जैसे हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जो शुक्राणु उत्पादन और उनकी गतिशीलता को प्रभावित कर सकता है।

  • आहार (Diet):
  • आपका आहार भी शुक्राणु की गतिशीलता को प्रभावित करता है। विटामिन C और E, जिंक, और ओमेगा-3 फैटी एसिड्स जैसे पोषक तत्व शुक्राणुओं की गुणवत्ता और गतिशीलता को बढ़ाने में मदद करते हैं। इनकी कमी होने पर शुक्राणु की गतिशीलता में कमी आ सकती है।

  • शारीरिक स्वास्थ्य (Physical Health):
  • मोटापा, हार्मोनल असंतुलन, और शारीरिक रोग जैसे बुखार और संक्रमण भी शुक्राणु की गतिशीलता को प्रभावित कर सकते हैं। मोटापे के कारण शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर घट सकता है, जिससे शुक्राणु की गुणवत्ता और गतिशीलता पर असर पड़ता है। इसके अलावा, अगर कोई व्यक्ति हार्मोनल असंतुलन से ग्रसित है, तो यह शुक्राणुओं के उत्पादन और गतिशीलता को प्रभावित कर सकता है।

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स्पर्म मोटिलिटी को कैसे बढ़ाएं? (Sperm Motility ko Kaise Badhayein?)

जब शुक्राणु की गतिशीलता में कमी होती है, तो इसे सुधारने के लिए कुछ आसान उपाय और जीवनशैली में बदलाव किए जा सकते हैं। अगर आप इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो ये उपाय आपके शुक्राणु की गतिशीलता को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

  • स्वस्थ आहार (Healthy Diet):
  • अपने आहार में विटामिन C और E, जिंक, सेलेनियम, और ओमेगा-3 फैटी एसिड्स शामिल करें। ये तत्व शुक्राणु की गुणवत्ता और गतिशीलता को बढ़ाने में मदद करते हैं। ताजे फल, सब्जियाँ, मछली, अखरोट और बीजों का सेवन बढ़ाएं।

  • व्यायाम (Exercise):
  • नियमित शारीरिक गतिविधि से रक्त संचार में सुधार होता है और यह शुक्राणु की गुणवत्ता और गतिशीलता को बढ़ाता है। व्यायाम से टेस्टोस्टेरोन का स्तर नियंत्रित रहता है और मोटापा भी कम होता है।

  • तनाव कम करें (Reduce Stress):
  • तनाव का प्रभाव सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य पर नहीं, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। तनाव के कारण शरीर में हार्मोनल असंतुलन हो सकता है, जो शुक्राणु की गतिशीलता को प्रभावित करता है। योग, ध्यान और गहरी श्वास की तकनीकें अपनाने से तनाव कम किया जा सकता है।

  • धूम्रपान और शराब से बचें (Avoid Smoking & Alcohol):
  • धूम्रपान और शराब के सेवन से शुक्राणु की गतिशीलता में कमी आ सकती है। इन आदतों को छोड़ने से न केवल आपकी स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि आपकी प्रजनन क्षमता भी बढ़ेगी।

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स्पर्म मोटिलिटी को बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक और प्राकृतिक उपाय (Sperm Motility ko Badhane ke Liye Ayurvedic Aur Natural Upay)

आयुर्वेद और प्राकृतिक उपचार आजकल बहुत ही लोकप्रिय हो रहे हैं, क्योंकि इनमें कोई हानिकारक साइड इफेक्ट्स नहीं होते। शुक्राणु की गतिशीलता बढ़ाने के लिए कई आयुर्वेदिक औषधियां और घरेलू उपाय उपलब्ध हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपनी प्रजनन क्षमता को बेहतर बना सकते हैं।

  • आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Remedies):
  • आयुर्वेद में कई जड़ी-बूटियाँ और औषधियाँ शुक्राणु की गुणवत्ता और गतिशीलता को बढ़ाने के लिए उपयोगी मानी जाती हैं। अश्वगंधा (Ashwagandha) एक बहुत ही प्रसिद्ध औषधि है, जो तनाव को कम करने, हार्मोनल संतुलन बनाए रखने और शुक्राणुओं की गतिशीलता को सुधारने में मदद करती है। इसके अलावा, शतावरी (Shatavari) का उपयोग भी पुरुषों के प्रजनन स्वास्थ्य को सुधारने के लिए किया जाता है।

  • प्राकृतिक उपाय (Natural Remedies):
  • शुक्राणु की गतिशीलता को सुधारने के लिए कुछ प्राकृतिक उपायों का पालन करना बहुत लाभकारी हो सकता है। तुलसी के पत्ते (Tulsi leaves) और मिश्री (Mishri) का सेवन करने से शुक्राणुओं की गुणवत्ता और गतिशीलता में सुधार हो सकता है। तुलसी का सेवन शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने में मदद करता है और शरीर के समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। इसके अलावा, गाजर का रस (Carrot juice) और सौंफ (Fennel seeds) का सेवन भी शुक्राणु की गति को बेहतर बना सकता है।

  • आयुर्वेदिक तेल (Ayurvedic Oils):
  • कपूर (Camphor) और सरसों का तेल (Mustard oil) जैसे तेलों का इस्तेमाल पुरुषों के प्रजनन अंगों की मालिश के लिए किया जा सकता है। यह रक्त संचार को बढ़ाता है और शुक्राणुओं की गति में सुधार करता है। आयुर्वेदिक उपायों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार अपनाना चाहिए, क्योंकि सही मात्रा और तरीके से इनका सेवन करना जरूरी होता है। इसके अलावा, अगर आप किसी अन्य इलाज या दवा का सेवन कर रहे हैं, तो आयुर्वेदिक उपचार के साथ उसका मेल बैठाने के लिए एक विशेषज्ञ की सलाह लें।

स्पर्म मोटिलिटी को बढ़ाने के लिए मेडिकल उपचार (Sperm Motility ko Badhane ke Liye Medical Treatments)

अगर जीवनशैली सुधारने और प्राकृतिक उपायों के बावजूद शुक्राणु की गतिशीलता में सुधार नहीं हो रहा है, तो मेडिकल उपचार की आवश्यकता हो सकती है। शुक्राणु की गतिशीलता को सुधारने के लिए कई आधुनिक चिकित्सा विधियाँ और तकनीकें उपलब्ध हैं।

  • हॉर्मोनल उपचार (Hormonal Treatments):
  • कुछ पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के स्तर में कमी हो सकती है, जिससे शुक्राणु की गतिशीलता पर असर पड़ता है। ऐसे में डॉक्टर टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाने के लिए हार्मोनल थेरेपी (Hormonal therapy) की सिफारिश कर सकते हैं। यह उपचार शुक्राणु के उत्पादन और उनकी गुणवत्ता को सुधार सकता है।

  • एंटीऑक्सिडेंट्स (Antioxidants):
  • कई शोधों से यह प्रमाणित हुआ है कि एंटीऑक्सिडेंट्स (Antioxidants) जैसे विटामिन C और E, सेलेनियम, और जिंक शुक्राणुओं की गतिशीलता को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। ये पोषक तत्व शुक्राणुओं को मुक्त कणों (free radicals) से होने वाले नुकसान से बचाते हैं और उनकी गुणवत्ता को सुधारते हैं। डॉक्टर एंटीऑक्सिडेंट्स की गोलियाँ या सप्लीमेंट्स सुझा सकते हैं।

  • आईवीएफ (IVF) और ICSI (ICSI):
  • अगर शुक्राणुओं की गतिशीलता अत्यधिक कम है, तो इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) और इंटरसाइटोप्लाज्मिक शुक्राणु इंजेक्शन (ICSI) जैसी तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है। इन विधियों में शुक्राणु को सीधे अंडाणु में इंजेक्ट किया जाता है, जिससे गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है। यह तब मददगार होता है जब शुक्राणु की गतिशीलता बहुत कम हो और सामान्य तरीके से गर्भधारण संभव न हो।

  • ऑक्सीजन थेरपी (Oxygen Therapy):
  • कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि ऑक्सीजन थेरपी शुक्राणुओं के स्वास्थ्य में सुधार कर सकती है। इस उपचार में उच्च मात्रा में ऑक्सीजन शरीर को प्रदान की जाती है, जिससे शुक्राणु की गुणवत्ता और गतिशीलता में वृद्धि हो सकती है। हालांकि, इस उपचार को चिकित्सक के मार्गदर्शन में ही अपनाना चाहिए।

स्पर्म मोटिलिटी को बढ़ाने के लिए जीवनशैली में बदलाव (Sperm Motility ko Badhane ke Liye Lifestyle Changes)

शुक्राणु की गतिशीलता को सुधारने के लिए जीवनशैली में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए जा सकते हैं। इन बदलावों का पालन करके आप अपने शुक्राणुओं की गुणवत्ता और गतिशीलता को बेहतर बना सकते हैं, जिससे गर्भधारण की संभावना बढ़ सकती है।

  • स्वस्थ आहार (Healthy Diet):
  • शुक्राणु की गतिशीलता बढ़ाने के लिए एक स्वस्थ आहार बहुत जरूरी है। आपको विटामिन C, E, और A, सेलेनियम, जिंक, ओमेगा-3 फैटी एसिड्स और फॉलिक एसिड से भरपूर आहार अपनाना चाहिए। इन पोषक तत्वों से शुक्राणुओं की गुणवत्ता और गति में सुधार होता है। हरी सब्जियाँ, फल, मछली, और अखरोट जैसे खाद्य पदार्थ आपके शुक्राणुओं को स्वस्थ रख सकते हैं।

  • नियमित व्यायाम (Regular Exercise):
  • नियमित व्यायाम से शरीर का रक्त संचार बेहतर होता है, जो शुक्राणु की गतिशीलता को बढ़ा सकता है। शारीरिक गतिविधियाँ जैसे तेज चलना, दौड़ना, तैराकी और साइक्लिंग से न केवल वजन नियंत्रित रहता है, बल्कि यह शुक्राणुओं की गुणवत्ता और गतिशीलता को भी सुधारने में मदद करता है। हालांकि, अत्यधिक व्यायाम से बचें, क्योंकि यह हार्मोनल असंतुलन पैदा कर सकता है।

  • तनाव कम करें (Reduce Stress):
  • आधुनिक जीवन में तनाव एक सामान्य समस्या बन चुकी है, लेकिन यह शुक्राणु की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। मानसिक तनाव से शरीर में कोर्टिसोल जैसे हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जो टेस्टोस्टेरोन के स्तर को प्रभावित कर सकता है। इसलिए, योग, ध्यान और गहरी श्वास की तकनीकें अपनाएं ताकि तनाव कम किया जा सके।

  • धूम्रपान और शराब से बचें (Avoid Smoking & Alcohol):
  • धूम्रपान और शराब के सेवन से शुक्राणु की गतिशीलता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इनसे शुक्राणुओं की संरचना और गति दोनों में कमी हो सकती है। अगर आप प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो इन आदतों से बचना चाहिए।

स्पर्म मोटिलिटी के लिए महत्वपूर्ण जीवनशैली आदतें (Sperm Motility ke Liye Important Lifestyle Habits)

स्पर्म मोटिलिटी में सुधार के लिए कुछ और जीवनशैली आदतें हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपनी प्रजनन क्षमता में सुधार कर सकते हैं।

  • नम वातावरण से बचें (Avoid Hot Environments):
  • आपके अंडकोष (testicles) को सामान्य तापमान से थोड़ा ठंडा होना चाहिए ताकि शुक्राणु का उत्पादन और गतिशीलता बनी रहे। अत्यधिक गर्मी, जैसे लंबे समय तक स्टीम बाथ लेना, गर्म पानी में स्नान करना, या लैपटॉप को गोद में रखना, इन सभी से शुक्राणु की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

  • फिजिकल चेक-अप करवाएं (Get Regular Checkups):
  • शुक्राणु की गतिशीलता को सुधारने के लिए समय-समय पर स्वास्थ्य जांच करवाना जरूरी है। अगर आपको कोई शारीरिक समस्या है, जैसे हार्मोनल असंतुलन, तो उसका इलाज जल्द से जल्द कराना चाहिए।

स्पर्म मोटिलिटी एक महत्वपूर्ण पहलू है जो प्रजनन क्षमता पर असर डालता है। शुक्राणु की गतिशीलता को बढ़ाने के लिए जीवनशैली में सुधार, आहार में बदलाव, और आयुर्वेदिक या चिकित्सा उपचार की मदद से आप इसे बेहतर अगर आप स्पर्म मोटिलिटी (Sperm Motility) को लेकर चिंतित हैं और जानना चाहते हैं कि इसे कैसे बढ़ाएं, तो क्रिस्टा IVF आपके लिए है। कोलकाता में IVF क्लिनिक IVF Clinic in Kolkata के रूप में हम आपकी प्रजनन क्षमता को सुधारने के लिए विशेषज्ञ उपचार प्रदान करते हैं। हम स्पर्म मोटिलिटी को बढ़ाने के लिए प्रभावी उपचार विधियाँ और सलाह देते हैं। आज ही हमसे संपर्क करें और अपने परिवार के सपनों को साकार करें।

Disclaimer

As per the "PCPNDT" (Regulation and Prevention of Misuse) Act, 1994, Gender Selection and Determination is strictly prohibited and is a criminal offense. Our centers strictly do not determine the sex of the fetus. The content is for informational and educational purposes only. Treatment of patients varies based on his/her medical condition. Always consult with your doctor for any treatment.

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