क्या थायरॉयड गर्भावस्था में बच्चे को प्रभावित करता है?

क्या थायरॉयड गर्भावस्था में बच्चे को प्रभावित करता है, does thyroid affect the baby in pregnancy

Does Thyroid Affect the Baby in Pregnancy?

थायरॉयड रोग कई विकारों का समूह होता है और यह आपकी थायरॉयड ग्रंथि पर असर डालता है। थायरॉयड आपकी गर्दन के सामने वाले भाग पर एक छोटी तितली के आकार की ग्रंथि होती है जिससे थायरॉयड नाम के हार्मोन का स्राव होता है। थायरॉयड हार्मोन शरीर की ऊर्जा का नियंत्रण एवं इसके इस्तेमाल को निर्धारित करता है। इसके साथ ही यह आपके शरीर के संचालन हेतु हर जरूरी अंग पर असर डालता है। थायरॉयड ग्रंथि में दिक्कत होने की वजह से यह हार्मोन शरीर में कभी तो बहुत ज्यादा तो कभी बहुत ही कम हो जाता है। शरीर में थायरॉयड हार्मोन के बहुत अधिक होने को हाइपरथायरॉयडिज्म (Hyperthyroidism) कहा जाता है। इसकी वजह से आपके शरीर के कई कामों में तेजी आती है। वहीं अगर शरीर में थायरॉयड हार्मोन बहुत ही कम हो जाता है तो ऐसी स्थिति को हाइपोथायरॉयडिज्म कहा जाता है। इसकी वजह से आपके शरीर के कई काम धीमे हो जाते हैं।

थायरॉयड रोग होने के कारण (Reason behind Thyroid Disease)

गर्भावस्था के दौरान हाइपरथायरॉयडिज्म रोग होने के कारण (Causes of Hyperthyroidism Disease During Pregnancy): गर्भावस्था में आमतौर पर यह बीमारी ग्रेव्स रोग की वजह से होती है। ग्रेव्स की बीमारी में आमतौर पर आप थकान को काफी महसूस करते हैं और आपकी आंखें भी बाहर की तरफ आ जाती है। यह आपकी प्रतिरक्षा तंत्र की समस्या होती है। इस समस्या में आप की प्रतिरक्षा प्रणाली इस तरह के एंटीबॉडीज को विकसित करना शुरू करती है जिसकी वजह से थायरॉयड ग्रंथि ज्यादा मात्रा में थायरॉयड हार्मोन बनाना शुरू करने लगती है। थायरॉयड को बढ़ाने वाले इन एंटीबॉडी को पीएसआई भी कहते हैंयह रोग गर्भावस्था के समय हो सकता है। यदि गर्भवती महिला को यह बीमारी पहले से हो तो वह इसके लक्षणों से निपटने के लिए दूसरे और तीसरे महीने में ही इलाज भी करा सकती है। बच्चा पैदा होने के बाद आने वाले कुछ महीनों में जब महिलाओं के शरीर का पीएसआई लेवल बढ़ जाता है तो ग्रेव्स की बीमारी गंभीर रूप धारण कर सकती है। इसके लिए डॉक्टर हर महीने परीक्षण करते हैं और इनके आधार पर इस बीमारी का इलाज किया जाता है। थायरॉयड की ज्यादा मात्रा गर्भवती महिला और उसके शिशु की सेहत के लिए खराब मानी जाती है।हाइपरथायरॉयडिज्म के कुछ मामलों में महिला को उल्टियां आना या फिर जी मिचलाना जैसी दिक्कतें आ सकती हैं। यही कारण है कि गर्भवती महिलाओं का थायरॉयड में वजन कम होना आम होता है और उनके शरीर में पानी की भी कमी हो जाती है।

गर्भावस्था के दौरान हाइपोथायरॉयडिज्म के कारण (Causes of Hypothyroidism During Pregnancy): गर्भावस्था में हाइपोथायरॉयडिज्म मुख्य तौर पर हाशिमोटो रोग की वजह से होता है। गर्भधारण करने वाली 100 में से दो से तीन महिलाओं में ही यह रोग होता है। हाशिमोटो रोग एक प्रकार का प्रतिरक्षा प्रणाली संबंधी विकार है। हाशिमोटो की बीमारी में प्रतिरक्षा तंत्र इस तरह के एंटीबॉडीज बनाता है जो थायरॉयड ग्रंथि पर सीधा हमला करते हैं जिससे कि इस ग्रंथि में सूजन आ जाती है। इस वजह से यह ग्रंथि थायरॉयड हार्मोन को बनाने में कम सक्रिय हो जाती है।

गर्भावस्था में थायरॉयड से बच्चे पर होने वाले असर (Does Thyroid Disease Affect Baby During Pregnancy)

गर्भावस्था के समय होने वाला थायरॉयड आपको और आपके बच्चे पर असर डाल सकता है। हाइपरथायरॉयडिज्म और हाइपोथायरॉयडिज्म यह दोनों ही ऐसी स्थितियां है जो आप या आपके बच्चे पर असर डालती हैं। चलिए तो अब यह जानने की कोशिश करते हैं ऐसी स्थिति में हमारे बच्चे पर क्या प्रभाव पड़ता है:

  • समय से पहले शिशु का जन्म
  • जन्म के दौरान शिशु के वजन का कम होना
  • गर्भधारण के आखिरी चरण में मां के रक्तचाप में तेजी से वृद्धि होना
  • थायरॉयड संबंधी गंभीर स्थिति उत्पन्न होना
  • दिल का काम करना बंद करना
  • दिल की धड़कन तेज होना और दिल का सही से काम ना करना
  • बच्चे के सिर पर नरम स्थान होना
  • जन्म के बाद बच्चे में चिड़चिड़ापन होना
  • बच्चे की सांस की नली पर दबाव पड़ना जिससे कि बच्चे को सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है।

गर्भावस्था में थायरॉयड रोग का इलाज (Treatment of Thyroid Disease During Pregnancy)

गर्भावस्था में हाइपरथायरॉयडिज्म का इलाज (Hyperthyroidism Treatment in Pregnancy): महिलाओं में थायरॉयड के साइड इफेक्ट कई हैं।अगर आप की स्थिति काफी गंभीर है तो डॉक्टर आपको एंटीथायरॉयड दवा देंगे। इन दवाओं की वजह से आपकी थायरॉयड ग्रंथि कम थायरॉयड हार्मोन का निर्माण करती है। इस तरह से आपका बढ़ा हुआ थायरॉयड हार्मोन शिशु के खून में नहीं जा पाता। ऐसा करने के लिए आपको किसी विशेषज्ञ के पास जाना होता है। यह विशेषज्ञ आप की स्थिति की सही से जांच करेंगे और उचित दवा दे पाएंगे।इलाज के लिए विशेषज्ञ के पास ही जाना इसलिए जरूरी होता है क्योंकि इसमें कहीं इस तरह की दवाई होती हैं जो बच्चे के लिए काफी खतरनाक हो सकती हैं। कई गर्भवती महिलाओं को तीसरी तिमाही तक थायरॉयड मेडिसिन लेने की आवश्यकता नहीं होती है। आपको इस बात की भी जानकारी होनी चाहिए कि महिलाओं में थायरॉयड कितना होना चाहिए ताकि जब यह बढ़े तो आप तुरंत डॉक्टर के पास परमार्श के लिए जाएँ।

गर्भावस्था में हाइपोथायरॉयडिज्म का इलाज(Treatment of Hypothyroidism in pregnancy): इस अवस्था में हार्मोन की मात्रा को बढ़ाने की कोशिश की जाती है। इसके लिए महिला को कुछ दवाई दी जाती है। यह टी3 की तरह होती है। थायरॉयड में टी3 और टी4 दो प्रकार के हार्मोन का निर्माण होता है जिन का कार्य मेटाबॉलिज्म को सही करना होता है। डॉक्टर जिन दवाइयों को देता है वह बच्चे के लिए सुरक्षित होती हैं। इसके साथ ही जब तक बच्चे में खुद से थायरॉयड हार्मोन नहीं बनता है तब तक यह दवाई फायदेमंद मानी जाती है।

क्या आपको भी लगता है कि क्या थायरॉयड में प्रेगनेंसी नहीं होती। इस लेख को पढ़ने के बाद आप जान ही चुके हैं कि थायरॉयड गर्भावस्था में एक बच्चे को किस तरह से प्रभावित करता है। अगर आप चाहते हैं कि आपके बच्चे को किसी भी तरह की कोई दिक्कत ना हो तो आपको क्रिस्टा आईवीएफ के पास आने की सलाह दी जाती है। यह भारत का सबसे अच्छे फर्टिलिटी हॉस्पिटल है जिसमें सारी तरह की सर्विस दी जाती हैं। इस हेल्थ केयर सेंटर में सारी नवीनतम मशीनें, लैब और अनुभवी डाक्टर मौजूद हैं जिससे आपको यह सुनिश्चित हो जाता है कि आपको सर्वोत्तम इलाज मिलेगा।